जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय Jaishankar Prasad Biography in Hindi

जयशंकर प्रसाद का जीवन परिचय Jaishankar Prasad Biography in Hindi

नाम-जयशंकर प्रसाद

जन्म-सन् (1889) ई० 

जन्मस्थान-काशी 

पिता का नाम-देवी प्रसाद

शिक्षा-अंग्रेजी, फ़ारसी, उर्दू हिंदी व संस्कृत का स्वाध्याय। 

रुचि-साहित्य के प्रति, काव्य रचना, नाटक लेखन 

लेखन-विधा-काव्य, कहानी उपन्यास, नाटक निबन्ध

मृत्यु-15 नवंबर (1937) 

जीवन परिचय:-
जयशंकर प्रसाद हिंदी कवि,नाटककार, कहानीकार, उपन्यासकार तथा निबन्ध- लेखक थे। वे हिंदी के छायावादी युग के चार प्रमुख कवियों में से एक हैं। इनके पिता देवी प्रसाद पैतृक परम्परा से सुरती और तम्बाकू का व्यापार करते थे और काशी में अत्यन्त सम्मानित व्यक्ति थे अत: प्रसाद जी का पालन अत्यन्त सुखमय वातावरण में हुआ था। वह बड़े निश्चत भाव से खाते पीते और व्यापर करते थे और घुड़सवार से भी उन्हें लगाव था। इस कारण प्रसाद जी ह्ष्ट-पुष्ट शरीर वर्ष की अवस्था में ही इनके पिता की मृत्यु हो गई। सारा कारोबार इनके बड़े भाई शंभुरत्न को संभालना पड़ा। 

जयशंकर प्रसाद का जन्म:-
जयशंकर प्रसाद जी का जन्म 1889 ई० में काशी के एक प्रतिष्ठित कान्यकुब्ज वैश्य परिवार में हुआ। 

जयशंकर प्रसाद का शिक्षा:-
बाल्यावस्था से ही प्रसाद जी का सम्पर्क कलाविदों, कवियों और संगीतज्ञों से रहा। ऐसे वातावरण में प्रसाद जी की कवि प्रतिभा स्वयं ही विकसित होती चली गई। कवि समाज में समस्या पूर्तियों से प्रसाद जी की कविता का आरम्भ हुआ।वेद-उपनिषदों के गहन अध्यन ने प्रसाद जी को चिन्तनशील और जिसके कारण इनके काव्य में करुणा की भावना आ गई। जब कवि बारह वर्ष के थे तभी इनके पिता की मृत्यु हो गई सारा कारोबार इनके बड़े भाई शंभुरत्न को संभालना पड़ा और इन्हें भी उनकी सहायता के लिए स्कूल छोड़ना पड़ा। अब वह घर पर ही अंग्रेजी, हिंदी, संस्कृत,उर्दू ओर फ़ारसी का अध्यन करने लगे। इनकी संस्कृत के प्रति विशेष रुचि थी अत: इन्हों वेद, उपनिष, स्मृति, पुराण व बौद्ध जैन ग्रंन्थों का अनुशीलन किया। धीरे-धीरे उनकी कविता के प्रति रुचि बढ़ने लगी। शुरू में तो भाई ने इसका विरोध किया, परन्तु कुछ दिनों बाद आने-जाने वाले कवियों द्वारा उनकी प्रशंसा होने लगी तो शंभुरत्न जी ने उन्हें कविता लिखने की पूरी आजादी दे दी। 

जयशंकर प्रसाद का मृत्यु :-
जयशंकर प्रसाद जी की मृत्यु 15 नवम्बर सन् 1937 ई० में हो गया।

जयशंकर प्रसाद का प्रथम रचना:-
नौ वर्ष की उम्र में उन्होंने 'कलाधर' उपनाम से व्रजभाषा में एक सवैया लिखा था। आरम्भिक रचनायें व्रजभाषा में लिखा जिसे छोड़कर धीरे-धीरे हिंदी में आ गये। अपने मामा अम्बिका प्रसाद गुप्त सम्पादित 'इंदु' पत्रिका में इनकी प्रथम रचना प्रकाशित हुई 'चित्रधार' प्रसाद का पहला संग्रह है। 'कानन कुसुम' प्रसाद की खड़ी बोली का प्रथम संस्करण है। इसमें प्रसाद ने अनुभूति और अभिव्यक्ति की नयी दिशा तलाशने की चेष्टा की है। 'प्रेम-पथिक' का व्रजभाषा स्वरूप सबसे पहले 'इंदु' में छपा जिसके बाद में कवि ने खड़ी बोली में रूपांतरित किया। 'प्रेम-पथिक' एक भाव मूलक कथा है, जिसके माध्यम से आदर्श प्रेम की व्यनजं की गयी है। 'करुणालय' की रचना 'गति नाट्य' के आधार पर हुई। महाराणा का महत्व 'इंदु' में प्रकाशित हुआ था। इसमें प्रसाद के व्यक्तित्व का प्रथम बार प्रकाशन हुआ। और इसमें आधुनिक काव्य की प्रवृत्तियों को अधिक उजागर देखा जा सकता है। 

'झरना':-का प्रथम प्रकाशन 1927 ई० में हुआ था। इसमें प्रसाद के व्यक्तित्व का प्रथम बार प्रकाशन हुआ और इसमें आधुनिक काव्य की प्रवृत्तियों को अधिक उजागर देखा जा सकता है। झरना में प्रसाद के व्यक्तित्व को पहली बार स्पष्ट रूप में देखा जा सकता है। इसमें छायावाद को प्रतिष्ठित देखा जा सकता है। 

'आँसू':- एक श्रेष्ठ गीतिकाव्य है। जिसमें कवि की प्रेमानुभूति व्यंजित है। इसका मूल-स्वर विषाद का है पर अंत में आशा-विश्वाश के स्वर हैं। 

'लहर':-में प्रसाद की सर्वोत्तम कवितायें संकलित हैं। इसमें कवि की पाकी हुई रचनायें हैं। 

'कामायनी':-प्रसाद का प्रबन्ध-काव्य है। इसका प्रथम संस्करण 1936 ई० में हुआ। 

'शिथिल':-प्रसाद जी की आरम्भिक रचना हैं। उनमें परम्परा की छाया भी दिखता है। 

जयशंकर प्रसाद का उपन्यास:-लितली, कंकाल और इरावती। 

जयशंकर प्रसाद का काव्य:-आंसू, कामायनी, चित्रधार, लहर और झरना। 

जयशंकर प्रसाद का कहानी:-आंधी, इंद्रजाल, छाया, प्रतिध्वनि आदि। 

जयशंकर प्रसाद का नाटक:-सज्जन, कल्याणी-परिणय, चंद्रगुप्त, स्कन्द गुप्त, आजतशत्रु प्रायश्चित, जन्मजय का नाम यज्ञ, विशाखा और ध्रुवस्वामिनी आदि। 

गीतिनाटक:-करुणाल। 

जयशंकर प्रसाद का कहानी संग्रह:- छाया, प्रतिध्वनि, आका-दीप, आँधी, इंद्रजाल

जयशंकर प्रसाद का निबन्ध और आलोचना:- काव्य और कला तथा अन्य निबन्ध।
 
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