जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' का जीवन परिचय jagannath Das Ratnakar Biography in Hindi

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' का जीवन परिचय jagannath Das Ratnakar Biography in Hindi

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' का जीवन परिचय

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर'


नाम-जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' 

जन्म-(1866) 

जन्म स्थान-काशी

मृत्यु-(1923)

पिता का नाम-पुरुषोत्तमदास 

पितामह का नाम-संगमलाल अग्रवाल

भाषा-ब्रजभाषा


जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' का जीवन परिचय:-
काल-प्रभाव की चिंता न कर आधुनिक युग में भी काव्य और कथन-शैली दोनों ही दृष्टियों से मध्यकालीन आदर्श को स्वीकार करने वाले कवियों में जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' (1866-1932) प्रमुख थे। इनके पूवर्ज हरियाणा के प्रसिध्द नगर पानीपत के निकट सफीदो नामक कस्बे के निवास थे, जो कई पीढ़ी पहले काशी में आ बसे थे। 

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' की शिक्षा:-
स्कूल की शिक्षि पूरी करके क्वींस कालेज में भर्ती हुए और सन् (1891) ई० में त्नाकर जी ने बी० ए० की परीक्षा उत्तीर्ण की। तत्पश्चात एम० ए० में प्रवेश किया किंतु माता का स्वर्गवास हो गया और घरेलू-परिस्थितियों के कारण शिक्षा का क्रम न चल सका।

कार्य:-
कुछ दिनों तक अवागढ़ रियासत में कोषाधिकारी रहे और फिर अयोध्या-नरेश के निजी सचिव के रूप में कार्य किया। उनके स्वर्गस्थ होने पर इनकी कार्य कुशलता से प्रभावित हो महारानी आयोध्या ने इन्हें अपने निजी सचिव के रूप में नियुक्त किया। 

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' की भक्ती-भावना:-
जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' भक्ती-भाव में भी तल्लीन रहा करते थे। उनकी भक्ति का दार्शनिक आधार मध्य,वल्लभ और चैतन्य की समन्वित विचारधारा है। वह राधा-कृष्ण को उपास्य मानकर वैष्णव-धर्म की उदारता लेकर चले हैं। उनमें राजनीतिक चेतनापूरी तरह भरी थी। राजनितिक दृष्टि से सर्वतोमुखी क्रांति के समर्थक और राष्ट्रीय गौरव के उन्नायक थे।

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' की काव्यगत विशेषताए:-
कवि जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' रीतिकाल और आधुनिककाल के बीच के कवि हैं। रीतिकाल का संस्कार और आधुनिककाल के प्रभाव के फलस्वरूप उनकी काव्यगत-चेतना श्रृंगारिक सौंदर्यगत चिंतन-धारा से ओत-प्रोत था। वे रईसाने ढंग से अभ्यस्त थे। प्राचीन संस्कृति धर्म और साहित्य में इनकी विशेष रुचि थी। मध्यकालीन हिंदी काव्य, उर्दू, फारसी, संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, मराठी, बंगाल, पंजाबी, आयुर्वेद, संगीत, ज्योतिष, व्याकरण, छन्दशास्त्र, विज्ञान, योग, दर्शन, इतिहास, पुरात्वत आदि की उन्हें अच्छी जानकारी थी।उन्होनें देश भर की यात्रा भी की थी। 

जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' का काव्य कृतियाँ:-
इनकी प्रमुख कृतियाँ हैं-(1)उद्धव शतक (2)गंगावतरण(3)विराष्टक(4)श्रृंगारा लहरी(5)रत्नाष्टक(6)कलाकाशी(7)हरिश्चंद्र(8)गंगा लहरी(9)विष्णु लहरी(10)हिंडोला(11)समालोचनादर्श आदि।

 जगन्नाथ दास 'रत्नाकर' का संपादित ग्रन्थ:-
(1)बिहारी रत्नाकर
(2)हिततरंगिणी
(3)सूरदास आदि। 

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