शासक और इमारतें Social Science Class 7th Chapter-5 Ncert

शासक और इमारतें Social Science Class 7th Chapter-5 Ncert

इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पी प्रश्न-उत्तर का हल दिया गया है। वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से पहले इन प्रश्नों की तैयारी अवश्य कर लें। हमारा वेबसाइट नॉट एनo सीo ईo आरo टी में कक्षा सात के सभी विषयों के प्रश्न उत्तर उपलब्ध है तथा इन सब को तैयार करते समय बहुत सावधानी बरती गई है फिर भी पुस्तक का सहारा अवश्य लें क्योंकि यहां पर उपलब्ध जानकारी से किसी भी प्रकार की हनी के लिए इस वेबसाइट के कर्ता-धर्ता जिम्मेदार नहीं होंगे।

1.रिक्त स्थानों की पूर्ति करें:-

(i)लिंगराज मंदिर ओडिशा में स्थित है। 
(ii)सूर्य मंदिर का निर्माण  नरसिंह देव प्रथम ने करवाया था। 
(iii)कुतुबमीनार का निर्माण कुतुबुद्दीन की याद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था। 
(iv)सल्तनत काल की पहली मस्जिद कुव्वत-उल-इस्लाम थी। 
(v)अलाई दरवाजा का अलाउद्दी खिलजी निर्माण ने करवाया था। 
(vi)हुमायूँ के मकबरे का निर्माण हमीदा बनो बेगम ने करवाया था। 
(vii)ताजमहल का स्थापत्यकार उस्ताद अहमद लाहौरी था। 

2.धार्मिक इमारत एवं धर्मनिरपेक्ष इमारत से आप क्या समझते हैं? 

Ans-धार्मिक इमारत-धार्मिक इमारतों में मंदिर, मकबरा इत्यादि बनाया जाता है। इन्हें धार्मिक इमारत इस वजह से कहते है, क्योंकि इनका संबंध किसी-न-किसी में किले, महल, हवेली, इत्यादि बनाया जाता है। इन्हें धर्मनिरपेक्ष इमारत इस वजह से कहते है, क्योंकि इनके द्वारा हमें प्रोधोगिकी, कौशल एवं तकनीकी का ज्ञान होता है। 


3.गोपुरम क्या होता है? 

Ans-राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम द्वारा महाराष्ट्र के एलोरा में निर्मित कैलाश मंदिर आठवीं शताब्दी के भव्य मंदिर मे से एक है। इस मंदिर का निर्माण एक ही पत्थर को तराश कर किया गया। मंदिर में घुसने का एक बड़ा रास्ता है, जिसे गोपुरम कहते हैं। 


4.सल्तनतकालीन स्थापत्य कला की क्या विशेषता थी?

  •  सल्तनतकालीन में निर्मित किला मकबरा, महल, मस्जिद एवं मीनारों में नुकीली मेहराब-गुंबदों तथा संकारी एवं उंची मिनारों का प्रयोग हुआ है। 
  • भारतीय एवं ईरानी शैली का प्रयोग निर्माण कार्य में किया गया।
  • सल्तनत काल में सुल्तानों अमीरों एवं सूफी संतों के स्मरणों में मकबरों के निर्माण की शुरूआत हुई। 
  • इमारतों की मजबूती के लिए पत्थर, कंक्रीट एवं अच्छे किस्म के चुने का प्रयोग किया गया। 
  • सल्तनत काल में पहली बार इमारतों में वैज्ञानिक ढंग से मेहराब एवं गुंबद का प्रयोग किया गया। यह कला भारतीयों ने अरबों से सिखा। गुबंद और मेहराब के निर्माण में शिक्षा एवं शहतीर  दोनों प्रणाली का प्रयोग किया। 
  • इमारतों की साज-सज्जा में अनेक प्रकार के फूल-पत्तियाँ, ज्यामितीय एवं कुरान की आयतें खुदाई गई। 

5.मुगलकालीन स्थापत्य कला की प्रमुख विशेषता क्या थी? 

  • मुगलकालीन में पहली बार आकार एवं डिजाइन की विविधता का प्रयोग किया गया। 
  • निर्माण सामाग्री में पत्थर के अलावा प्लस्तर एवं गचकारी का प्रयोग। 
  • पित्रादुरा का प्रयोग-सजावट के क्षेत्र में संगमरमर पर जवाहरात से की गई सजावट।
  • इस काल में बनने वाले गुंबदों एवं बुर्गों को कलशों से सजाया गया। 
  • बागों को गुंबदों के आसपास विकसित किया गया। 
  • सफेद संगमरमर और लाल बलुआ पत्थर का प्रयोग। 

6.पित्रादुरा शैली से आप क्या समझते हैं? 

Ans-पित्रादुरा एक वास्तु शैली थी जिसका प्रयोग शाहजहाँ शासनकाल में बनी इमारतों में धड़ल्ले से हुआ। इस शैली के अन्तर्गत उत्किणिति संगमरमर अथवा बलुआ पत्थर पर रंगीन, ठोस पत्थरों को दबाकर सुंदर तथा अलंकृत नमूने बनाए जाते थे। 

7.ताजमहल के निर्माण में कितने वर्ष लगे। इतना समय क्यों लगा। 

Ans-ताजमहल के निर्माण में 22 वर्ष लगे। इसके निर्माण में इतना समय इसलिए लगा क्योंकि इसके निर्माण में सहायता के लिए बगदाद तथा शिराज से हस्तकला विशेषज्ञ, गुबंद निर्माण बुखारा से शिखर निर्माण एवं बाग बगीचा निर्माण के लिए समरकंद से कुशल विशेषज्ञों को बुलाकर ताजमहल का निर्माण पूरा करवाया था। 

8.हुमायूँ स्थापत्य कला के विकासे पर ध्यान क्यों नही दे पाया था? 

Ans-मुगलकालीन स्थापत्य की शुरुआत बाबर के समय से होती है। उसने पानीपत के निकट काबुली बाग में एक मस्जिद का निर्माण करवाया था। बाबर ने रुहेलखंड में संभल की जमा मस्जिद और आगरा में लोदी किले के भीतर एक मस्जिद बनवाई। उसने चार बाग बध्दति व पानी की कृत्रिम व्यवस्था की ईरानी पध्दति भारत में प्रयुक्त की हुमायूँ का अधिकांश समय अपने खोये हुए साम्राज्य को पाने की कोशिशों में बीता। अंत: वह स्थापत्य कला के विकास पर ज्यादा समय नहीं दे पाया। उसने फतेहाबाद (हिसार)में फारस शैली में एक मस्जिद का निर्माण कराया। 

9.ताजमहल में मकराने का संगमरमर का ही प्रयोग क्यों किया गया। 

Ans-मकराने का संगमरमर का प्रयोग इसलिए किया गया क्योंकि इस संगमरमर से हस्तकला निर्माण, फूल-पत्ती की खुदाई, शिखर निर्माण, सुंदर सजावट का काम अच्छी तरह होता है। यह संगमरमर जोधपुर के 'मकराना' नामक स्थान से मिलता था। 


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