क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं Class 9th Chapter-2 Ncert

क्या हमारे आस-पास के पदार्थ शुद्ध हैं Class 9th Chapter-2 Ncert

इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पी प्रश्न-उत्तर का हल दिया गया है। वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से पहले इन प्रश्नों की तैयारी अवश्य कर लें। हमारा वेबसाइट नॉट एनo सीo ईo आरo टी में कक्षा नौ के सभी विषयों के प्रश्न उत्तर उपलब्ध है तथा इन सब को तैयार करते समय बहुत सावधानी बरती गई है फिर भी पुस्तक का सहारा अवश्य लें क्योंकि यहां पर उपलब्ध जानकारी से किसी भी प्रकार की हनी के लिए इस वेबसाइट के कर्ता-धर्ता जिम्मेदार नहीं होंगे।


1.निम्नलिखित को पृथक करने के लिए आप किन विधियों को अपनाएंगें? 

(a)सोडियम क्लोराइड को जल के विलयन से पृथक करने में। 

Ans-वाष्पीकरण

व्याख्या-सोडियम क्लोराइड की जल में घोलने पर एक ठोस-तरल विलयन बनता है। जब इस सोडियम क्लोराइड के जल के विलियन को गर्म किया जाता है, तो जल वाष्पीकृत होकर उड़ जाता है तथा सोडियम क्लोराइड बच जाता है। यह प्रक्रिया वाष्पीकरण कहलाती है। अत:वाष्पीकरण की प्रक्रिया द्वारा सोडियम क्लोराइड को जल के विलियन से पृथक किया जाता है। 

(b)अमोनियम क्लोराइड को सोडियम क्लोराइड तथा अमोनियम क्लोराइड के मिश्रण से पृथक करने में। 

Ans-उर्ध्वपातन (Subtimation) 

व्याख्या-जब अमोनियम क्लोराइड तथा सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) के मिश्रण को गर्म किया जाता है तो अमोनियम क्लोराइड उर्ध्वपातन होकर सोडियम क्लोराइड से अलग हो जाता है। अत: उर्ध्वपातन की विधि द्वारा अमोनियम क्लोराइड तथा सोडियम क्लोराइड (साधारण नमक) के मिश्रण से अमोनियम क्लोराइड को अलग किया सकता है। 

(c)धातु के छोटे टुकड़े को कार के इंजन ऑयल से पृथक करने में। 

Ans-छानन (Filtration) द्वारा

व्याख्या-धातु के छोटे टुकड़े कार इंजन में नहीं घुलते हैं। अत: उन्हें छनन (Filtartion) विधि द्वारा अलग किया जा सकता है। 

(d)दही मख्खन निकालने के लिए। 

Ans-अपकेंद्रीयकरण (Centrifugation) 

व्याख्या-अपकेंद्रीय की विधि में दही को एक बर्तन में रखकर तेजी से घुमाया जाता है।दही में उपस्थित वसा के कण जो महीना तथा भारी होते हैं, केन्द्रभिसारी बल (Centripetal force)के कारण केन्द्र की ओर जाकर तल में जमा होने लगते है, तथा दही के अन्य अवयव हल्के होने के कारण उपर तैरने है, जिसे अलग कर लिया जाता है। 
 

(e)जल से तेल निकालने के लिए। 

Ans-पृथककरण किप द्वारा 

व्याख्या-तेल का घनत्व जल से कम है, जिसके कारण तेल जल से हल्का होता है। हल्का होने के कारण जल तथा तेल के मिश्रण में तेल ऊपर तैरता है तथा जल निचले परत पर रहता है। चूँकि जल और तेल की परतें अलग-अलग होती है अत: सीधा बर्तन जिसमें तेल तथा जल का मिश्रण रखा गया हो पृथककरण किप की सहायता से जल के निचले परत को निस्तारित कर मिश्रण को पृथक किया जा सकता है। 

(f)चाय से चाय की पत्तियों को पृथक करने में। 

Ans-छानन विधि द्वारा

व्याख्या-चाय की पत्तियाँ चाय घुलनशील नहीं होते हैं। चाय की पत्तियाँ या तो चाय में तैरती रहती है या तो तल में बैठे जाती हैं चूँकि चाय की पत्तियाँ चाय में घुलती नहीं है अत: उन्हें फिल्टेरशन की विधि द्वारा छान कर पृथक किया जाता है। 

(g)बालू से लोहे की पिनों को पृथक करने में।

 Ans-चुंबकीय पृथककरण द्वारा

व्याख्या-यदि लोहे के पिनों की संख्या कम हो तो हाथ से चुनकर बालू से लोहे के पिनों को अलग किया जा सकता है परंतु यदि पिनों की संख्या अधिक हो तो उन्हें हाथ से चुनकर अलग करना असंभव हो जाता है। इस स्थित चुम्बकीय पृथककरण विधि का उपयोग किया जाता है। 

(h)भूसे गेहूँ के दानों को पृथक करने में। 

Ans-विष्पावन विधि द्वारा 

व्याख्या-फूटकन में है गेहूँ तथा भूसे के मिश्रण को कुछ ऊँचाई से नीचे गिराया जाता है। गेहूँ के दाने भारी होने के कारण नजदीक में गिर जाते हैं लेकिन भूसा के टुकड़े हल्के होने के कारण हवा से उड़कर दूर जा गिरते हैं। इस तरह फटकन की विधि द्वारा भूसे से गेहूँ के दानों को अगल कर लिया जाता है। 

(i)पानी में तैरते हुए महीन मिट्टी के कण को पानी से अलग करने के लिए। 

Ans-अपकेंद्रीय या वाष्पीकरण द्वारा

व्याख्या-पानी में मिट्टी के महीन कण निलंबित रहते है। ये कण काफी महीन होने के कारण तल में नहीं बैठते हैं। ये कण कोलाइड की तरह होते हैं। अत: फिल्टरेशन की विधि द्वारा इन्हें पृथक नहीं किया जा सकता हैं। अत: पानी में तैरते हुए महीन कणों को अपकेंद्रीय की विधि द्वारा अलग किया जाता है। 

(j)पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ से विभिन्न रंजक को पृथक करने में। 

Ans-क्रामौटोग्राफि

व्याख्या-पुष्प की पंखुड़ियों के निचोड़ में जल विलेयक के रूप में तथा रंग (डाइ) विलय के रूप में रहता है। इस निचोड़ के बूंद को फिल्टर पेपर पर डालकर जब उसके निचले सिरे को में डाला जाता है, तो जैसे ही जल फिल्टर पेपर पर ऊपर की दिशा की ओर अग्रासर होता है, यह डाई के कणों को भी अपने साथ ले लेता है। प्राय: पुष्प के पंखुड़ियों के रंजक अर्थात रंग दो या दो से अधिक रंगों का मिश्रण होता है। रंग वाला घटक जो कि जल में अधिक रंगों का मिश्रण होता है। रंग वाला घटक जो की जल में अधिक घुलनशील है, तेजी से ऊपर उठता है और इस प्रकार रंगों का पृथककरण संभव हो जाता है। 

2.50g जल में 313k पर पोटैशियम नाइट्रेट के संतृप्त विलयन को प्राप्त करने हेतु कितने ग्राम पोटैशियम नाइट्रेट की आवश्यकता होगी? 

Ans-दिया गया है 313k तापमान पर 100g जल में बना हुआ संतृप्त घोल में KNO3 की मात्रा= 62g 

अत:313k तापमान पर 50g जल में बने हुए संतृप्त घोल में KNO3 की मात्रा = 62/2 31g

अत: उत्तर 31g

3.प्रज्ञा 353k पर पोटैशियम क्लोराइड का एक संतृप्त विलयन तैयार करती है और विलयन को कमरे के तापमान पर ठण्डा होने के लिए छोड़ देती है। जब विलयन ठण्डा होगा तो वह क्या अवलोकित करेगी? स्पष्ट करें। 

Ans-सामान्यतया कमरे का तापमान लगभग 20°C या 293k (20+273K) लिया जाता प्रज्ञा 353K पर पोटैशियम क्लोराइड (549) का एक संतृप्त विलयन बनती है और उसे कमरे के ताप (20°C) पर ठण्डा होने के लिए छोड़ देती है। तापमान घटने के साथ ठोसों की द्रव में घुलनशीलता कम होती जाती है अत: 293K या 20°C पर 100g जल में पोटैशियम क्लोराइड की 35g मात्रा ही घुल पायेगी। शेष (54-35) 19g पोटैशियम क्लोराइड अविलेय के रूप में नीचे बैठना।प्रारम्भ कर देता है। 

4.293k पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता का परिकलन करें इस तापमान पर कौन-सा लवण सबसे अधिक घुलनशील होगा? 

Ans-4.293k पर प्रत्येक लवण की घुलनशीलता इस प्रकार है:- 
(i)पोटैशियम नाइट्रेट-32g
(ii)सोडियम क्लोराइड-36g
(iii)पोटैशियम क्लोराइड-35g
(iv)अमोनियम क्लोराइड-37g
29k पर अमोनियम सबसे अधिक घुलनशील होगा। 

5.तापमान में परिवर्तन से लवण की घुलनशीलता पर क्या प्रभाव पड़ता है। 

Ans-ताप में वृद्धि होने पर किसी लवण की घुलनशीलता बढ़ती है तथा ताप में कमी होने पर घुलनशीलता घटती है। 

6.निम्नलिखित से प्रत्येक को समांगी और विषमांगी मिश्रणों में वर्गीकृत करें सोडा जल लकड़ी, बर्फ वायु, मिट्टी, सिरका, छनी हुई चाय। 

Ans-समांगी मिश्रण:-सोडा, जल, बर्फ, वायु, सिरका, छनी हुई चाय। 

7.निम्न की उदाहरण सहित व्याख्या करें? 

Ans-(a)संतृप्त विलयन (Saturated solution) जब किसी दीए गए ताप पर किसी विलयन को संतृप्त विलयन कहा जाता है। उदाहरण-एक विकार में 50ml जल लेकर इसमें धीरे-धीरे नमक (सोडियम क्लोराइड) तब तक मिलते हैं जब तक सोडियम क्लोराइड घुलना बंद न कर दे। इस प्रकार तैयार विलयन 25°C (कमरे का ताप) पर नमक का संतृप्त विलयन होता है। 

(b)शुद्ध पदार्थ (Pure Substance):- शुद्ध पदार्थ वह है जो एक ही प्रकार के कणों से मिलकर बना होता है तथा उसमें मौजूद सभी कण रासायनिक प्रकृति के होते है:-जैसे, चाँदी आदि। 

(c)क्लोराइड (collaid):-कोलाइड विलयन वे है, जिनमें विलेय के कणों का आकार विलयन से बड़े परंतु निलंबन से छोटे (1nm और eyes) से नहीं देखा जा सकता है तथा ये स्थानीय होते है। कोलाइड टिंडल प्रभाव उत्पन्न करते है जैसे:- रक्त,दूध, फेस क्रीम, मक्खन इत्यादि। 

(d)निलंनब (Suspension):-निलंनब एक विषमांगी मिश्रण है, जिसमें विलेय पदार्थ के कण घुलते नहीं है, बल्कि माध्यम की समष्टि में निलंनब रहते हैं। ये निलंबित कण आँखों से देखे जा सकते हैं। यदि मिश्रण को कुछ देर तक बिना हिलाए छोड़ दे तो ठोस कण नीचे बैठे जाता है जैसे:-कीचड़ का पानी, रेत का पानी, चॉक पाउडर तथा पानी, पानी में चुना पत्थर इत्यादि। 

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