किशोरावस्था की और class 8th chapter-8 Ncert

किशोरावस्था की और class 8th Science chapter-8 Ncert

इस अध्याय के सभी महत्वपूर्ण बहुविकल्पी प्रश्न-उत्तर का हल दिया गया है। वार्षिक परीक्षा में शामिल होने से पहले इन प्रश्नों की तैयारी अवश्य कर लें। हमारा वेबसाइट नॉट एनo सीo ईo आरo टी में कक्षा आठ के सभी विषयों के प्रश्न उत्तर उपलब्ध है तथा इन सब को तैयार करते समय बहुत सावधानी बरती गई है फिर भी पुस्तक का सहारा अवश्य लें क्योंकि यहां पर उपलब्ध जानकारी से किसी भी प्रकार की हनी के लिए इस वेबसाइट के कर्ता-धर्ता जिम्मेदार नहीं होंगे।


सही विकल्प चुनीय-

(क)किशोर को सचेत रहना चाहिए कि वह क्या खा रहे हैं, क्योंकि
(1)उचित भोजन से उनके मस्तिष्क का विकास होता है। 
(11)शरीर में तिव्रगति से होने वाली वृद्धि के लिए उचित आहार की आवश्यकता होती है।(
(111)किशोर में स्वाद कलिकाएं (ग्रन्थियाँ) भली भाँति विकसित होती हैं। 
(1V)किशोर को हर समय भूख लगती रहती है। 

(ख)महिलायों में जनन आयु (काल) का प्रारम्भ उस समय जब उनके:
(1)ऋतुस्त्राव प्रारम्भ होता है।(
(11)स्तन विकसित होना प्रारम्भ करते हैं। 
(111)शारीरिक भार में वृद्धि होने लगती है। 
(1V)शरीर की लंबाई बढ़ती है। 

(ग)निम्न में से कौन सा आहार किशोर के लिए सर्वोचित है। 
(1)चिप्स, नूडल्स, कोक
(11)रोटी,दाल,सब्जियाँ(
(111)चावल,नूडल्स, बर्गर
(1V)शारीरिक टिक्की, चिप्स तथा लेपन पेय

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

1.किशोरावस्था किसी कहते है? 

Ans-जीवन काल की वह अवधि जब शरीर में ऐसे परिवर्तन होते है, जिनके परिणामस्वरूप जनन परिपक्वता आती है, किशोरावस्था (Adolescence)कहलाती है। 

2.यौवनारंभ क्या है? 

Ans-किशोरावस्था की शुरुआत लगभग 10-11 वर्ष की आयु में होती है तथा यह 18-19 वर्ष की आयु तक रहती है। लड़कियों में यह अवस्था लड़कों की अपेक्षा 1-2 वर्ष पूर्व में ही प्रारंभ हो जाती है। जीवनकाल की इस अवधि को अंग्रेजी में टीन्स (Teens) तथा किशोर बालिकाओं एवं बालकों को टीनएजर्स (Teenagers) कहा जाता है। इस उम्र में जनन क्षमता का विकास होना यौनारंभ कहलाता है। मानव के जीवनकाल में उनके उम्र के अनुसार कई अवस्थाएं होती हैं, जैसे 0-5 वर्ष की उम्र को शैशवावस्था 6-10 वर्ष की उम्र को बाल्यावस्था 11-19 वर्ष तक की उम्र किशोरावस्था फिर युवाववस्था तथा इसके बाद की अवस्था को प्रौढ़ावस्था कहते हैं। 

3.यौवनारंभ में होने वाले परिवर्तन-

Ans-यौवनारंभ में जनन क्षमता के विकास के साथ-साथ कई शारीरिक, मानसिक एवं भावनात्मक बदलाव (परिवर्तन) होते हैं, जैसे-लंबाई में वृद्धि किशोरावस्था के दौरान लड़के तथा लड़कियों की लंबाई में वृद्धि की दर अलग-अलग होती है। हम जानते हैं कि समान उम्र के प्रत्येक लड़के तथा लड़कियों की लंबाई एक जैसी नहीं होती। लड़कियों की लंबाई 16-17 वर्ष तक पूर्ण हो जाती है। जबकि लड़कों की लंबाई में वृद्धि 18 वर्ष की आयु तक जारी रहती है। 

4.क्या हैं नलिका विहीन ग्रन्थियाँ? 

Ans-कुछ ग्रन्थियाँ जैसे कि स्वेदग्रन्थि, तैलग्रन्थि तथा लारग्रन्थि श्राव वाहियों द्वारा श्रावित होती है। ये ग्रन्थियाँ हार्मों को सीधे रक्त प्रवाह में डाल देती हैं, इसलिए इन्हें नलिका-विहीन ग्रन्थियाँ भी कहा जाता है। इन्हें अंत:श्रावी ग्रन्थियाँ भी कहा जाता है। 

5.ऐडम्स ऐप्पल क्या है? 

Ans-यौवनारम्भ में स्वरयंत्र अथवा लैरिन्क्स वृद्धि की शुरुआत हो जाती है। लड़कों का स्वरयंत्र लड़कियों की अपेक्षा बड़ा हो जाता है और गले के सामने उभरा हुआ दिखाई देने लगता है। इसे ऐडम्स ऐप्पल  (Adams Apple) या कंठमणि कहा जाता है। 

6.अगर भोजन में लौह तत्व की कमी हो तो क्या होता है? 

Ans-भोजन में लौह तत्व की कमी से कमजोरी का आभास होता है। इससे अनिमिया रोग भी हो सकता है। लौह तत्व  रक्त का निर्माण भी करता है। इसलिए किशोरावस्था में लौहयुक्त खाद्य पदार्थ जैसे-पात्तीदार सब्जियाँ,गुड़,मांस, संतरा आदि का सेवन अनिवार्य है। 

7.कायांतरण क्या है? 

Ans-कीट एवं मेढक को व्यस्क रूप में आने के लिए अनेक चरणों से गुजरना पड़ता है। लार्वा से व्यस्क बनने की इस प्रक्रिया को कायांतरण कहते हैं। 

8.ऋतुस्त्राव क्या है? किजिए। 

Ans-महिलायों में यौवनांरभ पर अंडाणु परिक्व होने लगते हैं। यदि अंडाणु का निषेचन नहीं हो पाता तब उस स्थिति में अंडाणु तथा गर्भाशय का मोटा स्तर उसकी रुधिर वाहिकाओं सहित निस्तारित हो जाता है।इससे महिलायों में रक्तस्त्राव होता हैं।इसे ऋतुस्त्राव या रजोधर्म कहते हैं। इसकी अवधि 28 से 30 दिनों में एक बार होती है। 

9.यौवनारम्भ के समय होने वाले शारीरिक परिवर्तनों की सूची बनाइए। 

शारीरिक परिवर्तन की सूची:-

(1)लम्बाई में वृद्धि। 
(11)शारीरिक आकृति में परिवर्तन। 
(111)स्वर में परिवर्तन। 
(1V)स्वेद एवं तेलग्रंथियों की क्रियाशीलता में वृद्धि। 
(V)जनन अंगों का विकास। 
(V 1)मानसिक,बौद्धिक एवं संवेदनात्मक परिपक्वता प्राप्त होना। 

10.लिंग हार्मोंन क्या है? उनका नामकरण इस प्रकार क्यों किया गया? उनके कार्य बताइए। 

Ans-हमारे शरीर में उनके अन्त: स्त्रावी ग्रन्थियो हैं। वृषण एवं अंडाणु लैंगिक हार्मोंन स्त्रावित करते हैं। ये हार्मोंन गौण लैंगिक हार्मोंन के लिए उत्तरदायी है जो लड़कियों को लड़कों से अलग पहचानने में मदद करते हैं। इसलिए इन हार्मोंन को लिंग हार्मोंन भी कहते है। लैंगिक लिंग हार्मोंन भी पीयूष ग्रन्थी द्वारा स्त्रावित हार्मोंन के नियंत्रण में है। 

लिंग हार्मोंन के प्रकार्य:-
  • पीयूष ग्रन्थी से स्त्रावित हार्मोंन जननांगों को पुरुष तथा स्त्री में स्त्रावित करने के लिए उद्दीपित करता है। 
  • रुधिर प्रवाह में स्त्रावित किया जाता है तथा शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता हैं। 
  • यौवनारम्भ के समय शरीर में परिवर्तनों को उद्दीपित करता है। 

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